होटो पे सचाई रहती है..

स्वर्गीय श्री मुकेशजी का गया हुवा ये बेहतरीन गाना आप के लिए प्रस्तुत करता हूँ, आशा है आप को ज़रूर पसंद आएगा..
फिल्म जिस देश मे गंगा बहती है से लिए गये इस गाने मे ज़िंदगी की हूबहू सचाई नज़र आती है…यह गाना सुन कर हमे अपने देश पर नाज़ होता है..ओर यह गाना गाने को जी करता है..

होटो पे सचाई रहती है…
होटो पे सचाई रहती है, जहा दिल मे सफाई रहती है
हम उस देश के वासी है-२ ,जिस देश मे गंगा बहती है..२

१) महमा जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है..२)
ज़्यादा की नही लालच हम को, थोड़े मे गुज़ारा होता है,.२
बच्चो के लिए ये धरती मा ,सदियो से कई दुख सहती है,
हम उस देश के वाशी है-२,जिस देश मे गंगा बहती है…
… होटो पे सचाई रहती है..

२) कुछ लोग जो ज़्यादा जानते है, इंसान को कम पहचानते है..२)
ये पूरब है पूरब वाले, हर जान की कीमत जानते है-२)
मिल जुल के रहो ओर प्यार करो, एक जीत यही तो रहती है
हम उस देश के वाशी है-२, जिस देश मे गंगा बहती है….
…..होटो पे सचाई रहती है..

३) जो जिस से मिला सीखा हम ने, गैरो को भी अपनाया हम ने..२)
मतलब के लिए अंधे हो कर, रोटी को नही पूजा हम ने-२)
अब हम तो क्या सारी दुनिया, सारी दुनिया ये कहती है,
हम उस देश के वाशी है-२, जिस देश  मे गंगा बहती है….
…..होतो पे सचाई रहती है..
….जहा दिल मे..हम उस…जिस देश मे…

!! इति  !!

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By saptswar Posted in Uncategorized

2 comments on “होटो पे सचाई रहती है..

  1. क्या वजह है कि यह गाना सुनकर दिल भर आया आंख उभर आई ?
    वह सबकुछ जो कहा है इन शब्दोमे वह बिलकुल सच कहा है क्यो कि गत मास ही मैने ईस गानेवाले उमदा कलाकार और उससे भी उमदा ईन्सानसे मेरी मुलाकात हुई.
    मै श्री प्रकाश्जीके घर मेहमान था तो जो मेरी खातीर की है उसका कोई जवाब नही वर्ना बम्बई जैसे शहरमें कीसको कीसके लिये वक्त है ?
    उअर आगे कहा है..कुछ लोग जो ज्यादा जानते है…मुझे आपमें एक भक्त के दर्शन हुए अभिमान का तो पता ही नहि किन्तु मुझे आपके भी दोस्तो की तबियत पूछने होअसिप्टल ले गये..आप सचमें ही जानकी कीमत जानते है…और जो प्यार दिया है मूझे उसके लिये आप्के परिवारको मित्रोको कैसे भूल पाउ ? सभी मिलकर फील्म दिखाने ले गये…खाना खाने ले गये..अजितभाई की भी याद आती है…आगे कहा है मतलब के लिये अन्धे होकर रोटीको नही पूजा हमने…यह भी आपके जीवन्मे मैने अनुभव किया…जो भोजन भावसे मुझे खिलाया है उससे तो आपका भावधन जाना पडता है आप बडे व्योपारी है..मैने ऐसे भी अबजोपति ब्योपारी देखे है जो..केला खाते है और छीलका ही गाय को दान दे सकते है !!!
    प्रकाश्भाइ बिलकुल सच बात है…रिशिमुनीयोके तप के पश्चात ही उअस देश्मे यह सन्स्कार आये होगे इसमे शक नही है..नदी को भी लोग माता कहते है..तो यह सब कारण है..कीतने गीनाउ ? बहोत ही ह्रुदय्श्पर्शी लगा आपका यह गाना..मुझे याद है मेरे सामने ही आपने यह गाना गाया था…आजकल कईबार ऐसे आदर्शवादी गानोसे युवान तो मुह मचकोडने लगते है !! उअन्को तो अच्छा लगता है शोर…आप्के लिये गान यह उपासना की तरह है…यह ईति से कहा जा सकता है…आप गाते ही रहीए और खुब प्रगति करीए ऐसी मेरी शुभेच्छा है..

    • प्रिय दिलीप भाई,
      आपके भाव पूर्णा शब्दो से आँख भर आई है..इतना प्रेम किसी इंसान मे भी हो सकता है? यह मैने आपके अल्फ़ाज़ से जाना है आज..!!
      आप हमारे घर आए ओर हम साथ रहे सिर्फ़ दो दीनो के लिए..फिर भी इतनी आत्मीयता जुटा पाया हूँ आप से की जिसकी कोई सीमा नहीं..शायद यह गाना बिल्कुल आप के लिए ही बना था..! जो शब्द आप ने मेरे लिए अर्पण किए है उसके हक़दार आप ही है..! मगर फिर भी एक सचे ओर निखालस इंसान से दोस्ती की परिभाषा शिख ली है..भगवान आप को ओर आप के परिवार को बहुत आनंद प्रदान करे ऐसी भावना के साथ….!
      प्रकाश सोनी.

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